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रेवतीरमण शर्मा कविताएँ

रेवतीरमण शर्मा
1.

गली के मुहाने
बन गया है जानवरों
का एक श्मशान - घाट
सुबह मरी भैंस
पडी रही दूसरे दिन
सुबह तक।
कूडे के ढेर को उठाया नहीं
दफनाया जाता है
दुर्गंध से हो रहा दूभर जीना
कूडे को नहीं
आदमी को ठिकाने
लगा रही है पालिका।
2. मेरा वोट

उसने कहा-
आप मेरे वोटर हैं।
कल वोट पडेंगे
आपका वोट पक्का है
मेरे लिए और मैं चुप रहा।
किसी दूसरे ने कहा-
आप वोटर हैं और आपका
वोट पक्का है मेरे लिए।
किसी तीसरे ने कहा-
पक्का है आपका वोट मेरे लिए, मैं चुप रहा
दूसरे दिन वे कहीं नहीं दिखे।
मैंने मन में कहा
मेरा वोट पक्का है
उनके लिए जिसे मैंने वोट दिया है।

3. कविता का रंग

जिन कवियों ने लिख डाली हैं
एक दो या दस बीस कविताएँ
वे यही समझते रहे
वे शीघ्र ही चढ जाएँगे कविता के शिखर पर।
गोष्ठी में वे न बौखलाते हैं
न खिसियाते हैं।
वे सिर्फ सुनना चाहते हैं
वरिष्ठ और वयोवृद्ध कवियों को
पूछना चाहते हैं
कैसे खिलते हैं फूल
कविता के गमलों में
कैसे मँडराती हैं तितलियाँ
नवोदित पुष्पों पर।
कैसे हो जाता है चटख रंग
उनकी कविताओं का।


सम्पर्क - 49, मधुवन कॉलोनी,
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