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साहित्यिक समाचार

जिसके हृदय रस भाव, उसके अधर नव गान है
राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी
श्रीडूँगरगढ. यहाँ राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति के तत्वावधान में रविवार को राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित संस्कृति भवन में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यऋम के मुख्य अतिथि शिक्षाविद व पर्यावरणविद ताराचन्द इन्दौरिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस संस्था ने अपना नाम व मुकाम हासिल करने में कडी मेहनत की है। आज साहित्यिक जगत में इस संस्था ने अपनी अमिट छाप छोडी है और कस्बे को गौरवान्नित किया है। अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार डॉ. मदन सैनी ने कहा कि कविता मन का आंतरिक भाव है और अलंकार उसका सौन्दर्यकरण व रूप है। विशिष्ट अतिथि लॉयन महावीर माली ने कहा कि इस संस्था एवं यहाँ होने वाले कार्यऋमों के प्रति कस्बे के लोगों में चाव बना रहता है।
इससे पूर्व सरस्वती वंदना के साथ शुरू हुई काव्य गोष्ठी में लूणकरणसर के राज बिजारणियां, वली मोहम्मद गोरी, डॉ. कृष्णा आचार्य, मनोज कुमार, सीतादेवी राठी ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ कर दाद बटोरी।
मंत्री साहित्यकार रवि पुरोहित ने संस्था की गतिविधियों से अवगत करवाते हुए इस वर्ष चल रहे हीरक जयंती अवसर पर होने वाले आयोजनों की जानकारी दी।
- रवि पुरोहित

नहीं रही शब्द शिल्पी
मन्नू भण्डारी
हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका मन्नू भण्डारी का निधन हो गया. वे 90 वर्ष की थीं। महाभोज और आपका बंटी जैसी कालजयी रचनाओं की लेखिका ने सोमवार की सुबह अंतिम साँस ली।
उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर व्याप्त है। साहित्यकारों, पत्रकारों, फिल्मी दुनिया और राजनीति से जुडे लोगों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वाले लोगों की निरन्तरता जारी है।
मन्नू भण्डारी के पिता सुख सम्पतराय भी जाने-माने लेखक थे। राजस्थानी मूल की मन्नू भण्डारी वर्तमान में गुडगाँव में अपनी बेटी रचना यादव के पास रहती थीं। बताया जा रहा है कि वह लम्बे समय से बीमार चल रही थीं। रचना यादव प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं। पिता राजेंद्र यादव की मृत्यु के बाद हंस पत्रिका का संचालन और प्रबंधन रचना यादव ही कर रही हैं।
मन्नू भंडारी ने हिंदी साहित्य जगत को एक से बढकर एक रचनाएँ दीं। प्रसिद्ध निर्देशक बासु चटर्जी ने उनकी कहानी यही सच है पर 1974 में रजनीगंधा फिल्म बनाई गई.
- डेस्क मधुमती