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पूनम पाण्डे की कविताएँ

पूनम पाण्डे

महके मौसम में

महके मौसम में,
बहुत रोमानी से
खयालात उमडने लगते हैं
और दिल के झरोख पर
गुदगुदी करने लगते हैं ।

महके मौसम में ,
आँखे जैसे छटपटाती
है।

महके मौसम में ,
कदम बहकते है
और होंठ हैं कि
हँसते ही जाते हैं।

महके मौसम में ,
मन एक ऐसी चिट्ठी को
बाँचता है
जो बार बार पढकर भी
कहीं से रह जाती है
अनपढी,

महके मौसम में,
बहुत दूर से भी,
मन भरकर
गपिया और
बतिया लेते हैं हम


एक सुखी मन

अपनी रूचि की
एक बगिया
में मन खूब खिला।

मन ने अपने अनुकूल
एक पथ चुना
और गिरते- पडते
चलना सीखा।
वहाँ कुछ राहगीर
थोडा इंतजार
करके आगे बढ गए।

मन ने हौले-हौले से
चलकर रास्ते से बतियाना
सीखा और
रास्ते के
कंकड- पत्थरों ने बनाए रखा।
मन का बातूनी स्वभाव ।

मन के हिस्से की धूप ने,
अँधेरी रात में भी
सुनसान को
गुलजार किया।

पहाड की चोटी
पर से जाकर आती
तमाम हवाएँ ,छूकर
देती रहीं
मन के हिस्से की
खुशबू।
मन उस महक को
मन में भर कर
साँसों को आबाद
कर सकता था।
इस संतोषी मन को देख,
राहगीर भौंचक थे।
इस,,
मन के साथ हमेशा रही ,
एक सुन्दर अनुभूति ।
और गहरी खुशी ।


कविता, रिश्ते

रिश्तों को माफिक नहीं जाती
जरूरत से ज्यादा
खोजी नजर ।
अत्यधिक जागरूकता
खत्म कर देती है
रिश्तों की गरमाहट को
और लापरवाही , अलमस्ती, नादानी से
बहुत मधुर हो जाते हैं रिश्ते ।
प्रगाढ रिश्ते कभी नहीं चाहते
कि उनको जबरदस्ती निभाया जाए
वो कोई मासिक किश्त नहीं हैं कि
समय पर सही तरीके से
भरी नहीं गई तो
बेदखल कर दिये जाएँगे
सम्बन्ध की किताब से
उखाड दिए जाएँगे
बँधनों की क्यारी से
बहुत प्रयत्न शील होना
खतरनाक है
प्यारे रिश्तों के लिए ।

रिश्ते तो मन से बनाये जाते हैं ।
नहीं होती कोई
एक्सपायरी डेट



सम्पर्क - दुर्गेश, पुष्कर रोड, कोहरा
अजमेर-३०५००४
मो. ९८२८७९२७२०