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साहित्यिक समाचार

मेरी कृतियाँ मेरीसंवेदना का स्पन्दन : दीनदयाल शर्मा
हनुमानगढ। बाल साहित्यकार एवं कवि दीनदयाल शर्मा की हिन्दी काव्य कृति जहाँ मैं खडा हूं का लोकार्पण हुआ। लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ऊर्जावान गीतकार डॉ. संदेश त्यागी ने कहा कि कविता अपने देखे-भोगे का तथातथ्य बखानभर नहीं है बल्कि यह व्यक्ति को परिमार्जित कर उसे प्रगति के पथ पर अग्रसर करती है। लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवि, कथाकार एवं अनुवादक डॉ. मदन गोपाल लढा ने कहा कि कविता उन चीजों और भावों की अपने कथ्य के माध्यम से जागरूक करती है, जो हमारे बीच से विस्मृत होती जा रही है। कवि एवं विशिष्ट अतिथि नरेश मेहन ने कहा कि शब्द साधना के माध्यम से दीनदयाल शर्मा ने जो मुकाम हासिल किया है उन्हें शब्द तपस्वी के रूप में रेखांकित किया जा सकता है।
अपने रचनाक्रम के विविध पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए संग्रह के कवि और बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा ने कहा कि इन कविताओं के माध्यम से उन्होंने अपने जीवन और परिवेश के उन विषय वस्तुओं को काव्यात्मक अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया है, जिन्होंने उनकी संवेदना को समय-समय पर स्पंदित किया है। परिषद् के उपाध्यक्ष एवं साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत युवा कवि दुष्यन्त जोशी ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया।
शिक्षिका और युवा कवयित्रि भावना विशाल ने कहा कि ये कविताएँ जीवन के प्रति आस्था और भरोसे को जगाने वाली है।
राजस्थान साहित्य परिषद् के तत्वावधान में मकर संक्रंाति के पावन पर्व पर वरिष्ठ बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा की हिन्दी भाषा की बाल साहित्य कृति प्रेरणाप्रद बाल पहेलियाँ का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि अधिवक्ता मुश्ताक जोइया, विशिष्ट अतिथि युवा शायर प्रेम भटनेरी रहे जबकि अध्यक्षता राज्य स्तरीय अहिंसा बोर्ड के जिला सह संयोजक एवं युवा नेता तरुण विजय ने की। मुख्य आतिथ्य के उद्बोधन में अधिवक्ता मुश्ताक जोइया ने कहा कि पुस्तकों की प्रासंगिकता को देखते हुए पुस्तकें पढी जानी जरूरी है, लेकिन वर्तमान में बच्चों को मोबाइल का नशा इतना हो रहा है जो अफीम के नशे से भी अधिक घातक है। अध्यक्षीय उद्बोधन में युवा नेता तरुण विजय ने कहा कि बच्चों को देश के महापुरुषों एवं विदुषियों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी दी जानी चाहिए ताकि बच्चे इनके जीवन के संघर्षों से प्रेरणा ले सके। विशिष्ट अतिथि के रूप में युवा शायर प्रेम भटनेरी, परिषद् सचिव राजेन्द्र डाल परिषद् के उपाध्यक्ष एवं साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली से पुरस्कृति युवा कवि दुष्यन्त जोशी और साहित्य प्रेमी रामस्वरूप भाटी भी उपस्थित रहे। गत दिनों इससे पूर्व बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा की राजस्थानी बाल निबंध संस्मरण की द्वितीय संस्करण कृति ‘बाळपणै री बातां’ बाल गीत कृति ‘कुदरत की लीला है न्यारी’ तथा व्यंग्य कृति एक ही उल्लू काफी है का लोकार्पण भी हुआ। - दुष्यन्त जोशी
नन्द चतुर्वेदी की कविताओं का वैशिष्ट्य उसकी वक्रता है
कीर्तिशेष कवि नंद चतुर्वेदी की पुण्य स्मृति में कवि गोष्ठी एवं पुस्तक लोकार्पण
कविताओं का वैशिष्ट्य उसकी वक्रता है, कविता कोई सीधी पंक्ति नहीं है। कविताएँ समय का साक्षात्कार करवाती है। यह विचार प्रोफेसर सदाशिव श्रोत्रिय ने नन्द बाबू की पुण्य स्मृति में आयोजित काव्य गोष्ठी में व्यक्त किए। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय कार्यालय में स्मरणांजलि कवि गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें संभाग के तकरीबन 30 कवियों ने नंद बाबू की स्मृति में काव्य पाठ कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर श्री नंद चतुर्वेदी की हिमांशु पंड्या द्वारा संपादित सद्य प्रकाशित कविता पुस्तक हम नई कविताएँ लिखते हैं का विमोचन वरिष्ठ साहित्यकार श्री सदाशिव श्रोत्रिय डॉ महेंद्र भाणावत और वरिष्ठ गीतकार श्री कृष्ण दाधीच एवं कवयित्री डाक्टर रजनी कुलश्रेष्ठ ने किया।
कार्यक्रम का संयोजन करते हुए डॉ.इंद्रप्रकाश श्रीमाली ने नन्द बाबू को जन संघर्ष का कवि माना। फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि नंद बाबू की राजनीतिक वैचारिकता का कविताओं में अभिव्यक्त होना साहित्य को व्यापक फलक पर ले आता है। डॉ मंजू चतुर्वेदी ने अनुत्तरित प्रश्न कविता का अंश सुनाया। सामने सूरज चमक रहा था और उडान भरती स्त्री का इश्तहार था। ।
लोककला अध्येता महेंद्र भाणावत ने नंद बाबू के साथ बिताएँ समय के संस्मरण सुनाए। गीतकार श्री कृष्ण दाधीच ने मुझ को डर था तुम जाओगे एक दिवस सबके मन बसिया। सुनाकर भावुक कर दिया। कार्यक्रम में प्रोफेसर माधव हाडा ने नंद बाबू की कविताओं को समय सापेक्ष बताया।
- मंजु चतुर्वेदी

मौलिक साहित्यिक लेखन के राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए
प्रविष्टियाँ आमंत्रित
बीकानेर। हिन्दी व राजस्थानी भाषा-साहित्य के मौलिक लेखन को सम्मान प्रदान करने के दृष्टिगत राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूँगरगढ द्वारा प्रति वर्ष दिए जाने वाले पुरस्कार क्रमशः डॉ नंदलाल महर्षि स्मृति हिन्दी साहित्य सृजन पुरस्कार, पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार हेतु कृतियाँ/प्रस्ताव बतौर प्रविष्टि आमंत्रित की गई है। इस आशय की जानकारी देते हुए संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने बताया कि उक्त दोनों ही पुरस्कार ग्यारह-ग्यारह हजार रूपये के होंगे और 14 सितम्बर, 2022 को संस्था के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोज्य समारोह में प्रदान किए जायेंगे। महर्षि ने बताया कि भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय अवदान के लिए दिए जाने वाले प्रतिष्ठित श्री मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान के लिए भी प्रस्ताव आमंत्रित किए गये हैं। इस सम्मान हेतु विगत 20 वर्षों के सम्बन्धित क्षेत्र के अवदान को ध्यान में रखा जाएगा।
संस्था के मंत्री रवि पुरोहित ने बताया कि हिन्दी व राजस्थानी पुरस्कारों के लिए आवेदक की आवेदित पुस्तक या प्रस्तावक द्वारा प्रस्तावित पुस्तक पुरस्कार वर्ष से 5 वर्ष पूर्व तक की कालावधि में प्रकाशित होनी चाहिए । इस वर्ष 2022 के पुरस्कारों हेतु वर्ष 2017 से 2021 तक के प्रकाशन ही विचारार्थ स्वीकार्य होंगे। पुरस्कार हेतु आवेदित/प्रस्तावित कृति साहित्य की किसी भी विधा में हो सकती है परन्तु विश्वविद्यालय की डिग्री या अन्य परियोजनाओं के तहत किए गए कार्य/शोध इस हेतु मान्य नहीं होंगे। सम्पादित कृतियाँ, विवरणिकाएँ, स्मृति या अभिनन्दन-ग्रन्थ, रचना समग्र, स्मारिकाएँ, अनुवाद, साझा संकलन आदि पुरस्कार की मौलिक लेखन की परिभाषा में शामिल नहीं होंगे और कोई भी आवेदक किसी वर्ष विशेष में केवल एक ही पुरस्कार हेतु आवेदन कर सकेगा ।
उपाध्यक्ष बजरंग शर्मा ने बताया कि विहित अवधि में प्रकाशित पुस्तक की एक प्रति मय संक्षिप्त परिचय एवं फोटो 30 जून 2022 तक मंत्री, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, संस्कृति भवन, एन.एच.11 जयपुर रोड, श्रीडूंगरगढ (बीकानेर) राज0 331803 के पते पर पहुँच जानी चाहिए।

- रवि पुरोहित, बीकानेर