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साहित्यिक समाचार

केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के तत्वाधान में पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

राष्ट्र संस्कृति और मानवता की चुनौतियाँ एवं शोध विषय पर यूजीसी के मानदण्डों के अनुसार विस्तृत विवरण वाली शोध कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा, हिंदी यूनिवर्स फाउंडेशन, नीदरलैंड्स,राजकीय एचडी महाविद्यालय, ब्यावर,भगवंत विश्वविद्यालय अजमेर और बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय,आगरा के तत्वाधान में आयोजित किया गया। यह बहु उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सेमिनार दिनांक 12 से 16 मार्च 2022 तक अपराह्न 2:00 से 5:00 तक संचालित किया गया। इस बहुउद्देशीय कार्यशाला को दो भागों में विभाजित किया गया। पहले भाग में मुख्य विषय और उप विषयों पर देश-विदेश के विद्वानों ने उच्च शिक्षा के अंतर्गत शोध से जुडे समस्त प्रश्नों के समाधान आदि विषयों पर महत्त्वपूर्ण चर्चा की, दूसरे भाग में प्रतिदिन मुख्य वक्ताओं एवं जाने-माने साहित्यकारों ने क्रमशः राष्ट्र संस्कृति और मानवता की चुनौतियाँ, राष्ट्र संस्कृति और हम 12 मार्च 2022, साहित्य और समाज विमर्श शोध के नए आयाम,उच्च शिक्षा में शोध के नए आयाम 13 मार्च 2022,कला और साहित्य में नए आयाम और चुनौतियां, कला साहित्य पत्रकारिता में शोध और नए विषय 14 मार्च 2022, मैनेजमेन्ट वाणिज्य और शिक्षा दर्शन में शोध के नए आयाम,शोध जर्नल क्या है? और उनके मानदण्ड, शोध पत्र लेखन की सावधानियाँ, अस्वीकृत होने के कारण 15 मार्च 2022,राजनीति विज्ञान इतिहास शिक्षा दर्शन में शोध के नए आयाम,शिक्षा लैंगिक समानता और जीवन मूल्यों से बनता सशक्त राष्ट्र 16 मार्च 2022 विषयों पर उत्तम व्याख्यान दिया।

व्याख्यान देने वाले मुख्य अतिथियों एवं वक्ताओं में नामचीन कुलपति,विद्वान्, प्राध्यापक एवं साहित्यकारों की सहभागिता इस प्रकार रही :- (प्रथम दिन) प्रो. खेमसिंह डेहरीया(अध्यक्ष), प्रो. पुष्पिता अवस्थी (मुख्य अतिथि), डॉ. संदीप अवस्थी (वक्ता, मीडिया विशेषज्ञ), डॉ. ऋतु माथुर, (द्वितीय दिन) प्रो परांजपे (अध्यक्ष), प्रो. मोहन लाल छीपा (अतिथि), डॉ. राकेश दुबे,(दूसरा दिन) श्री महेंद्र भीष्म(अतिथि), प्रो. वैशाली मान्द्रेकर(अध्यक्ष), डॉ श्यामसुन्दर पाण्डे, डॉ शकुंतला सरूपरिया, श्री. सुमित उपाध्याय, डॉ विकास दवे (अतिथि), प्रोफेसर माला मिश्र (वक्ता), प्रोफेसर मनोज अवस्थी डॉक्टर लता चंदोला, (तृतीय दिन) प्रोफेसर अर्जुन चव्हाण(अतिथि) प्रोफेसर दर्शन पुरोहित, डॉ अलका धनपत, प्रोफेसर बीना शर्मा, प्रोफेसर दिलीप कुमार, डॉ. जूही शुकुल, (चतुर्थ दिन) डॉ. राजीव अवस्थी, डॉ. हंसा शुक्ल(वक्ता), डॉ. अवनीश कुमार, प्रो. सिद्दीकी मो. महमूद, (अतिथि), प्रो. अरुण शुक्ल (वक्ता), डॉ. स्मृति शुक्ल, (पंचम दिन) डॉ. सुधीर शर्मा रहे। कार्यशाला में कुशल मंच संचालन डॉ ऋतु माथुर,प्रयागराज, डॉ विजेता साव,कोलकत्ता, प्रोफेसर स्म्रति मिश्र,जबलपुर एवं डॉ. दीपा रस्तोगी,अशोकनगर ने किया।
- डॉ दीपा रस्तोगी
कामाख्या और अन्य कहानियाँ कृति पर भरत चन्द्र शर्मा को मिला प्रथम पुरस्कार
हिंदी साहित्य अकादमी गाँधीनगर गुजरात द्वारा साहित्य की विभिन्न विधाओं में वर्ष 2018 के लिए घोषित पुरस्कारों के वितरण हेतु साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
20 मार्च को अकादमी के सौजन्य से भव्य समारोह एच. के. कॉलेज आडिटोरियम हॉल आश्रम रोड अहमदाबाद में आयोजित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री विष्णु पंडया ने की, विशिष्ट अतिथि के रुप में हिंदी साहित्य भारती के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व शिक्षा मंत्री (उ. प्र.) श्री रवींद्र शुक्ल मंचासीन रहे।
अकादमी के महामंत्री श्री जयेन्द्र सिंह जाधव के निर्देशन में पारितोषिक वितरण के अन्तर्गत अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि महोदय ने कहानीकार भरत चन्द्र शर्मा को उनके कहानी संग्रह * कामाख्या और अन्य कहानियां* कृति को वर्ष 2018 की प्रथम पुरस्कार हेतु चयनित कृति हेतु प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, रु 11000/ पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया।
द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार रु 7000/ एवं रु 5000/ ऋमशः डॉ. दिलीप मेहरा एवं अजय ओझा को उनके कथा संग्रह *मकान पुराण* एवं * किरदार* के लिए प्रदान किये गए।
अध्यक्षीय उदबोधन में श्री विष्णु पंडया ने साहित्य के सामाजिक अवदान पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए कहा - सशक्त साहित्य लेखन हेतु अनुभूति की गहनता के साथ कठिन परिश्रम से साहित्यकार सृजन की पात्रता विकसित करता हैं।
विशिष्ट अतिथि श्री रवींद्र शुक्ल ने अपने उदबोधन में शब्द की महत्ता के माध्यम से चेतना की जागृति नवोन्मेषी समाज के निर्माण में किस तरह सहायक होती हैं इसकी विस्तार से व्याख्या की।
इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका में कहानीकार भरत चन्द्र शर्मा ने कहानी पर अपने अभिमत में लिखा - सशक्त कहानी कल्पना और यथार्थ की समानांतर पटरियों पर तीव्रगति से भागती रेलगाडी की तरह पाठक को अंत तक बांधे रखने की क्षमता रखती हैं,परिवेश का सशक्त चित्रण सामाजिक विसंगतियों की खाइयों से लेकर इन्द्रधनुषी स्वप्न तक के आरोह -अवरोह को प्रस्तुत करने में सक्षम होता हैं।
आयोजन के दूसरे सत्र में आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के संदर्भ में विश्व कविता दिवस की पूर्व संध्या पर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें नामवर कवियों सर्वश्री विनोद जोशी, अंकित त्रिवेदी, रमेश चौहाण, काजल ओझा,राजेश व्यास, सौम्य जोशी,रक्षा शुक्ल, प्रणव पंडया आदि ने भाव प्रवण रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लेखकों, साहित्य रसिकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवी श्रोताओं के सहभागित्व में इस गरिमामय आयोजन का सफल संचालन साहित्यकार श्री तेजस मजुमदार ने किया।
प्रस्तुति - डॉ. दीपक आचार्य।