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साहित्य समाचार

राजस्थान सहित देश के प्रतिष्ठित व्यंग्यकारों की कृतियाँ मॉरीशस में भेंट

विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के मंच पर व्यंग्य को पहली बार विमर्श की अंतरराष्ट्रीय जमीन मिलना ऐतिहासिक है -प्रेम जनमेजय
विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार आयोजित होने वाली व्यंग्य की कार्यशाला के विषय विशेषज्ञ की भूमिका निभाने वाले प्रेम जनमेजय ने उद्घाटन सत्र में व्यंग्य की अवधारणा पर अपनी बात कहते हुए कहा-आज विश्व हिंदी सचिवालय मॉरिशस के अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिंदी व्यंग्य अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहा है। सचिवालय के मंच पर पहली बार विमर्श और व्यंग्य पाठ को अंतरराष्ट्रीय जमीन मिलना इतिहास रचने जैसा है। इस इतिहास को रचने का श्रेय विश्व हिंदी सचिवालय की महासचिव, उपसचिव माधुरी रामधारी, शिक्षा मंत्रालय, महात्मा गाँधी संस्थान एवं कला संस्कृति मंत्रालय को जाता है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में प्रबंधक शिक्षा निरंजन बिगन ने कहा कि जैसे रात को चूहा काट जाता है, पर पता अगले दिन चलता है व्यंग्य का काटा भी ऐसा होता है। व्यंग्य समाज के कान की मैल निकालता है। सचिवालय की उपसचिव माधुरी रामधारी ने स्वागत भाषण में कहा कि आज के समय मे व्यंग्य की समझ बहुत आवश्यक है। व्यंग्य हिंदी साहित्य का महत्त्वपूर्ण अंग बन गया है। भारतीय उच्चायोग में द्वितीय सचिव सुनीता पाहुजा ने कहा कि भारत मे हिंदी व्यंग्य पर विमर्श के लिए प्रेम जनमेजय ने बहुत काम किया है। हिन्दी व्यंग्य की सुदृढ परम्परा को उन्होंने आगे बढाने का सार्थक काम किया है।
उद्घाटन सत्र में विशिष्ट वक्ताओं के वक्तव्यों के मध्य, मंच पर प्रेम जनमेजय की व्यंग्य रचना, हिंदी माथे की बिंदी नाटक सोते रहो और कविता वो गन्ध कहाँ है के कुछ अंशों की, महात्मा गाँधी संस्थान के छात्रों ने नाट्य प्रस्तुति की।
उद्घाटन सत्र के उपरांत तीन सत्रों में प्रेम जनमेजय ने बीए और एमए के छात्रों को व्यंग्य के स्वरूप, व्यंग्य की परम्परा, व्यंग्य के मनोविज्ञान और व्यंग्य की भाषा पर चालीस चालीस मिनट के व्याख्यान दिए। छात्रों ने न केवल इन्हें सुना अपितु प्रश्न भी किए।
विश्व हिन्दी सचिवालय के पुस्तकालय ने प्रेम जनमेजय का समस्त साहित्य खरीदा। प्रेम जनमेजय ने सचिवालय के पुस्तकालय को समृद्ध करने के लिए राजस्थान सहित देश के विभिन्न ख्यातनाम रचनाकारों की व्यंग्य कृतियाँ भेंट की।
23 जून को सभागार में श्एक शाम, हिंदी व्यंग्य के नामश् आयोजन में मॉरिशस के वरिष्ठ रचनाकार श्री उदयनारायण गंगू, श्री रामदेव धुरन्धर, डॉ वीरसेन जागासिंह, डॉ हेमराज सुन्दर, श्रीमती कल्पना लालजी, एवं नवोदित रचनाकार श्री सोमदत्त काशीनाथ और प्रेरणा ने व्यंग्य पाठ किया। प्रेम जनमेजय ने अपनी व्यंग्य रचना कबीरा क्यों खडा बाजार का पाठ किया। हर व्यंग्य रचना के मध्य भारतेन्दु, परसाई, नरेंद्र कोहली, हरीश नवल, प्रेम जनमेजय और गिरीश पंकज की रचनाओं के नाट्य अंश भी प्रस्तुत किए गए।
- फारूक आफरीदी, जयपुर
नहीं रहे प्रखर समालोचक, विख्यात शिक्षाविद डॉ. देवीप्रसाद गुप्त
हिंदी महाकाव्यों के विशेषज्ञ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित प्रखर समालोचक और शिक्षाविद डॉ. देवीप्रसाद गुप्त का देहान्त हो गया। वे लम्बे समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
राजकीय डूँगर महाविद्यालय के प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त डॉ देवीप्रसाद गुप्त हिंदी, संस्कृत, ब्रज, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी, राजस्थानी आदि कई भाषाओं के जानकार थे तथा लगभग 35 वर्षों तक राजस्थान के विभिन्न महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य करते हुए छात्रों को हिंदी साहित्य में दीक्षित किया। उनके निर्देशन में 40 से अधिक शोधार्थियों ने कथा, कविता,नाटक आदि विधाओं के साथ भाषा विज्ञान के आधारभूत शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधियाँ प्राप्त की, वहीं उनके निर्देशन में 100 से अधिक लघुशोध प्रबन्ध लेखन कार्य हुए।
डॉ देवीप्रसाद गुप्त बीकानेर के साहित्यकारों पर शोध कार्य कराने की परम्परा के सूत्रधार थे और उनके निर्देशन में यहाँ के अनेक साहित्यकारों के सृजन पर शोध कार्य हुआ ।
ख्यात विद्वान डॉ माताप्रसाद गुप्त के निर्देशन में उन्होंने हिंदी महाकाव्यों पर शोध कार्य किया तथा डॉ फादर कामिल बुल्के उनके साथी शोधार्थी रहे । हिंदी महाकाव्य सिद्धांत और मूल्यांकन, हिंदी के पौराणिक महाकाव्य, आधुनिक हिंदी प्रतिनिधि महाकाव्य, स्नातन्त्र्योत्तर हिंदी महाकाव्य, साहित्य सिद्धांत और समालोचना, साहित्यिक निबंध आदि उनके उल्लेखनीय शोध ग्रंथ हैं। उनका कहानी संग्रह पीला गुलाब बहुत चर्चित रहा।

- डेस्क मधुमती
अदबी उडान राष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मान 2022 हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित
अदबी उडान की ओर से आयोजित एक विशेष बैठक में सर्व सम्मति से तय किया गया कि प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी अदबी उडान 7वाँ राष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मान 2022 का आयोजन उदयपुर में भव्य रूप से 16 अक्टूबर 2022 रविवार को होगा। इस हेतु हिन्दी की विविध विधाओं में 30 सितम्बर 2022 तक पृष्ठियां आमंत्रित हैं।
अदबी उडान के संस्थापक सम्पादक खुर्शीद शेख खुर्शीद ने बताया कि अदबी उडान बहुआयामी साहित्यकार सम्मान रु 5000, वरिष्ठ साहित्यकार सम्मान रु 3000, सहित्यिक पत्रकारिता सम्मान रु 2000 के अतिरिक्त गजल, गीत, काव्य, कहानी, रजस्थानी भाषा, बाल जगत, नवोदित पुरुष, नवोदित महिला, युगल पुरुष, युगल महिला एवं महिला साहित्यकार सम्मान हेतु प्रत्येक को रु 1000पुरस्कार सहित शाल , पाग, उपरना एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट किये जाएँगे।इसके अतिरिक्त विशिष्ट साहित्यकार (10) व अदबी उडान सम्मान (5) को भी शाल, पाग, उपरना, प्रशस्ति पत्र दिये जाएँगे।
प्रकाशक इमरान शेख ने बताया कि उपर्युक्त विधाओं से सम्बंधित किसी भी वर्ष की प्रकाशित प्रतिनिधि पुस्तक, फोटो व संक्षिप्त परिचय के साथ रु 200 डाक-खर्च हेतु भेजना अनिवार्य है। अगर किसी साहित्यकार ने पूर्व में प्रविष्ठि भेजी मगर उन्हें अब तक सम्मान प्राप्त नहीं हुआ हो तो वे केवल डाक खर्च भेज दें उनकी प्रविष्टि भी सम्मिलित हो जाएगी।
आयोजन 16 अक्टूबर 2022 रविवार को उदयपुर में होगा। चयनित सूची 30 सितम्बर 2022 को जारी करदी जायगी। चयनित साहित्यकार को आयोजन में उपस्थित होना जरुरी है। इस हेतु कोई यात्रा व्यय देय नहीं है। उदयपुर में आवास एवं भोजन की जिम्म्मेदारी अदबी उडान की होगी।
- डेस्क मधुमती
डॉ.रामप्रसाद साहित्य सम्मान 2022 के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित
अन्तर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद द्वारा वर्ष 2022 के लिए हिन्दी के युवा साहित्यकारों हेतु वरिष्ठ कवि,चिंतक, नाटककार, भावानुवादक डॉ.रामप्रसाद दाधीच प्रसाद के नाम पर डॉ. रामप्रसाद दाधीच साहित्य सम्मान के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जाती हैं। इस बार यह सम्मान कविता विधा की उत्कृष्ट कृति पर दिया जाएगा। इस सम्मान के लिए राजस्थान के साहित्यकार पात्र होंगे। परिषद की महामंत्री डॉ. पद्मजा शर्मा ने बताया कि यह सम्मान पिछले पाँच वर्ष के भीतर प्रकाशित किसी विधा की उत्कृष्ट कृति पर दिया जाता है । इस बार यह सम्मान कविता विधा पर दिया जाएगा। निर्णायक समिति पुस्तक का चयन करती है। जिन साहित्यकारों की उम्र 50 वर्ष से कम है वे इस सम्मान के पात्र होंगे । प्रस्ताव और पुस्तक ,लेखकों / पाठकों द्वारा गाँधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र-,रेजीडेंसी रोड ,जोधपुर को 21 जुलाई 2022 तक भेजे जा सकते हैं। यह सम्मान 2017 में प्रारम्भ किया गया था। इससे पूर्व यह सम्मान प्रभात, माधव राठौड, प्रतिभा शर्मा, उषा दशोरा और वीणा चूंडावत को दिया जा चुका है।
- पद्मजा शर्मा, जोधपुर

कौशल किशोर को मिला जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान
जनवादी लेखक मंच, बाँदा और मुक्तिचक्र पत्रिका की ओर से कवि और संस्कृतिकर्मी कौशल किशोर को जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें मंच के अध्यक्ष जवाहरलाल जलज और मुक्तिचक्र पत्रिका के संपादक गोपाल गोयल द्वारा सम्मान के तौर पर अंगवस्त्र तथा प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। कार्यक्रम जैन धर्मशाला, बाँदा के सभागार में 22 जून को संपन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता पर्यावरणविद और प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने की तथा संचालन युवा आलोचक उमाशंकर सिंह परमार ने किया।

डॉ. आलम शाह खान की स्मृति में व्याख्यान
उदयपुर। व्यंग्यकार, लेखक, साहित्यकार कवि और मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी फारूख आफरीदी ने कहा कि डॉ. आलम शाह खान मेवाड की धरती पर जन्मे ऐसे अनमोल रतन हैं जो कहानी के कारण आज तक जिन्दा हैं। डॉ आलम शाह खान को परायी प्यास का सफर, किराए की कोख, एक और सीता जैसी कई अन्य रचनाओं के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा।
वे डॉ आलम शाह खान स्मृति व्याख्यान श्रृंखला के तहत साठोत्तरी हिंदी कहानी में हाशिये के लोग विषयक कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्य वक्ता कवि और लेखक कृष्ण कल्पित ने कहा कि साहित्य का दायरा बहुत लम्बा है। इसे दशकों में नहीं समेटा जा सकता है। उपेक्षित को अपनी कृतियों से उन्हें ऊपर लाना है। डॉ. खान 60 के दशक से ऐसे लोगों को आगे ले रहे थे। उनकी कहानियों के नाम प्रतीकात्मक होते थे जैसे पराई प्यास का सफर, एक और मौत, आवाज की अर्थी, किराए की कोख आदि जिससे कहानी का सार ही शीर्षक से पता चल जाता है। उनकी अधिकतर कहानियां हाशिये के, उपेक्षित लोगों के सफर पर ही होती थी।
इस अवसर पर तराना परवीन लिखित एक सौ आठ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
अध्यक्षता करते हुए प्रो सत्यनारायण व्यास ने कहा कि अन्न विचार में बदलता है। मेवाड की धरती डॉ खान के चरित्र से मेल खाती है। ये मरोड (स्वाभिमान) के लिए प्रसिद्ध है। जयपुर से आये कलमकार मंच के निशांत ने कहा कि डॉ खान को पढने के बाद यह महसूस होता है कि जितने सम्मान के वो हकदार थे, उन्हें वो नही मिला। कहानियों को वे लिखते ही नही आत्मसात भी करते थे।
- तराना परवीन