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तीन भीली गीत

प्रभात
ऐवा दुखां मं

जां जां बावडिया ने जां जां खेजडिया
ऐवा दुखां मं परणाया हो राज।

बाबो मारो रुपिया नो लोभी माताजी मारी
ऐवा दुखां मं परणाया हो राज।

चढती घाटी मं धको दे दो माताजी मारी
ऐवा दुखां मं परणाया हो राज।

बीरो मारो रुपिया नो लोभी भाभीजी मारी
ऐवा दुखां मं परणाया हो राज।

वइती नदी म धको दे दो भाभीजी मारी
ऐवा दुखां मं परणाया हो राज।

मामो मारो बीयर नो लोभी मामीजी मारी
ऐवा दुखां मं परणाया हो राज।

जां जां बावडिया ने जां जां खेजडिया
ऐवा दुखां मं परणाया हो राज।

प्रस्तुति - सोनू भूरिया, शारदी भाभोर, भूरी मेडा, झाबुआ
ऐसे दुखों में

खेजडी बबलों के काँटों भरे वन हैं
ऐसे दुखों में मुझे दे दी हे राज।

बाबा मेरा पैसों का लोभी है, ओ माँ
ऐसे दुखों में मुझे दे दी हे राज।

चढती घाटी से मुझे धक्का दे दो ओ माँ
ऐसे दुखों में मुझे दे दी हे राज।

भाई मेरा पैसों का लोभी है, भाभीजी मेरी
ऐसे दुखों में मुझे दे दी हे राज।

बहती नदी में धक्का दे दो भाभीजी मेरी
ऐसे दुखों में मुझे दे दी हे राज।

मामा मेरा शराब का लोभी है, मामीजी मेरी
ऐसे दुखों में मुझे दे दी हे राज।

खेजडी बबलों के काँटों भरे वन हैं
ऐसे दुखों में मुझे दे दी हे राज।


हुई खोवई रे

आतरी जगा मा मारी हुई खोवई रे।
कीने माथे पाडू मारी हुई खोवई रे।
सूना रूपाळी मारी हुई खोवई रे।
हूना नी हुई रे मारो रूपा नो दोरो रे।
कीने माथे पाडू मारी हुई खोवई रे।
परभात तारे माथे मारी हुई खोवई रे।
बुसट मा घाली मारी हुई खोवई रे।
बुसट झंझेड मारी हुई खोवई रे।
हूना नी हुई रे मारो रूपा नो दोरो रे।

प्रस्तुति - सोनू भूरिया, ष्षारदी भाभोर, झाबुआ


सुई खो गई रे

इतनी-सी जगह में मेरी सुई खो गई रे।
किसका नाम लगाऊँ, मेरी सुई खो गई रे।
सोने से भी प्यारी मेरी सुई खो गई रे।
अब किसको बोलूँ मेरी सुई खो गई रे।
परभात तूने ली है, मेरी सुई खो गई रे।
तूने शर्ट में रख ली है, मेरी सुई खो गई रे।
शर्ट को झडकार, मेरी सुई खो गई रे।
सोने की सुई थी, रूपहला घागा था
इतनी-सी जगह में मेरी सुई खो गई रे।



कीनौ कीनौ ओळंबो लायो हेरे

मेघा तू तौ कीनौ कीनौ ओळंबो, लायो हेरे मेघा
षेरया म रमवा जाए।

मेघा तू तौ धाने वेसी ने दारू पीवे हेरे मेघा
षेरया म रमवा जाए।

मेघा तू तौ कीनौ कीनौ ओळंबो, लायो हेरे मेघा
षेरया म रमवा जाए।

मेघा तारो सोरा सब भूखे मरे हेरे मेघा
षेरया म रमवा जाए।

मेघा तू तौ कीनौ कीनौ ओळंबो, लायो हेरे मेघा
षेरया म रमवा जाए।

प्रस्तुति - सोनू भूरिया, षारदी भाभोर, भूरी मेडा, झाबुआ

कैसी कैसी बातें हो रही हैं

मेघा तू तो कैसी कैसी बातें सामने लाया है रे
गलियों में तू क्या करता फिरा है?

मेघा तूने तो धान बेचकर दारू खरीदी है रे
गलियों में तू ये क्या करता फिरा है?

मेघा तेरे बच्चे भूखे बिलख रहे हैं रे
और तू गलियों में डगमगाता फिरा है

मेघा तू तो कैसी कैसी बातें सामने लाया है रे
गलियों में तू क्या करता फिरा है?

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