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साहित्यिक समाचार

राजस्थान को जानने-समझने का झरोखा है यह कवितांक- भनोत
सुपरिचित कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया के अतिथि सम्पादन में प्रकाशित सृजन कुंज के राजस्थानी कविता विशेषांक का लोकार्पण राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर में किया गया। लोकार्पण पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग राजस्थान जयपुर तथा राजस्थान राज्य अभिलेखागार के निदेशक डॉ. महेंद्र खडगावत, प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. शिवकुमार भनोत, प्रख्यात साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने किया।
निदेशक डॉ. महेन्द्र खडगावत ने कहा कि राजस्थानी कविता का इतिहास बहुत उज्ज्वल रहा है और सृजन कुंज का यह अंक राजस्थानी की आधुनिक कविता का एक सम्यक दस्तावेज प्रस्तुत करता है। अतिथि सम्पादक कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया के संपादन में प्रकाशित इस अंक के माध्याम से हिन्दी के विशाल पाठक वर्ग तक राजस्थानी कविता पहुँच सकेगी।
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. शिवकुमार भनोत ने कहा कि वर्तमान के राजस्थान को जानने-समझने का यह राजस्थानी कवितांक एक झरोखा है, जिसमें विभिन्न कवियों की कविताओं और विद्वानों के आलेखों द्वारा बदलते हुए राजस्थान के सांस्कृतिक और साहित्यिक परिवेश का सुन्दर अंकन हुआ है।
साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि सृजन कुंज के सम्पादक डॉ. कृष्ण कुमार आशु और अतिथि सम्पादक डॉ. नीरज दइया के अथक प्रयासों से इस अंक में राजस्थानी के सभी महत्त्वपूर्ण कवियों की रचनाओं को स्थान मिला है। डॉ. नीरज दइया अनुवाद और संपादन के कार्य को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाते रहे हैं।
अंक के अतिथि संपादक डॉ. नीरज दइया ने इस अवसर पर कहा कि आधुनिक राजस्थानी कविता की यह अंक एक झलक मात्र प्रस्तुत करता है। आधुनिक राजस्थानी कविता के अनेक हस्ताक्षर और विभिन्न धाराओं के कवियों की सक्रियता को रेखांकित किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
राजकीय डूँगर महाविद्यालय के व्याख्यात डॉ. विपिन सैनी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस अंक में राजस्थान के सभी संभागों के प्रतिनिधि कवियों को स्थान मिला है वहीं समग्र कविता के विकास को समझने का यह भागीरथ प्रयास है।
- डेस्क मधुमती
बाडेन-वुटैमबुर्ग फैलोशिप पंकज पाराशर को
अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्याल में हिन्दी साहित्य के प्रोफेसर, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत और उसके इतिहास के गहरे अध्एता पंकज पराशर को यूरोप के सबसे प्राचीन और विश्वविख्यात हाईडेलबर्ग विश्वविद्यालय (1386) के दक्षिण एशिया संस्थान ने इस वर्ष 2022 में अपने प्रतिष्ठित बाडेन-वुटैमबुर्ग फैलोशिप से नवाजने की घोषणा की है। इस सम्मान के तहत प्रोफेसर पंकज पराशर तकरीबन एक महीने तक जर्मनी में रहकर तवाइफ (नॉच गर्ल) एँड इंडियन नेशनलि*म विषय पर शोध-कार्य करेंगे। तत्पश्चात् वहाँ के नामचीन प्रोफेसरों, शोध-छात्रों और अध्एताओं के समक्ष एक सुदीर्घ व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे. पिछले कुछ वर्षों में प्रो. पराशर ने स्वतंत्रता से पूर्व के हिंदुस्तान के अनेक रियासतों और नगरों में सक्रिय तवाइफों के महती अवदान को अपने शोध द्वारा उजागर किया है. जिन तवाइफों ने अपनी गहन साधना से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को बेहद समृद्ध किया, उनके अवदान को भारतीय संस्कृति के इतिहासकारों ने इस तरह भुलाया कि बहुत सारी तवाइफों के नाम और काम दोनों से आम जनता आज अनजान है। अपने गहन शोध से प्रो. पराशर ने न सिर्फ उनके जीवन की कहानियों को हमारे सामने लाने का प्रयास किया है, बल्कि उनकी आवाज में रिकॉर्डेड बहुत सारी ग्रामोफोन डिस्क को भी ढूँढ निकाला है। अभी पिछले वर्ष ही उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत और सुगम संगीत में गहरी रुचि को उजागर करते हुए दो गहन शोधपरक लम्बे आलेख लिखे, जिसे नया ज्ञानोदय और मधुमती-जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका ने प्रकाशित किया। अपने इन दोनों आलेख में उन्होंने गाँधीजी के सर्वथा नए और अछूते पक्ष को निकलकर लोगों के सामने लाया। राजस्थान के संगीत साधकों के बारे में भी उन्होंने अपने शोधपरक लेख से आम पाठकों को बहुत सारी नई जानकारियाँ दीं हैं। जर्मनी स्थित हाईडेलबर्ग विश्वविद्यालय में जब प्रो पराशर भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में तवाइफों के योगदान को लेकर अपना गहन शोध कार्य करेंगे, तो निश्चित रूप से भारत के इतिहास के अनेक अनछुए और अनदेखे पहलू हमारे सामने आएँगे।
-डेस्क मधुमती
प्रेमचन्द रचना-संसार के अनूठे व बेजोड शिल्पकार-मदन सैनी
श्रीडूँगरगढ। प्रेमचन्द का अनुभव संसार बेहद व्यापक है और यह व्यापकता ही किसी रचनाकार को सर्वकालीन, सर्वमान्य व सार्वजनीन बनाती है। प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति द्वारा आयोजित आधुनिक साहित्य सन्दर्भ और प्रेमचन्द विषयक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. मदन सैनी ने व्यक्त किए। विशिष्ट अतिथि डॉ. चेतन स्वामी ने कहा कि हिन्दी कहानियाँ खूब सारे काल, विषय, विमर्श, रुझान और मूल्यों के बदलाव के दौर से गुजर चुकी हैं, परन्तु आज के कथा प्रसंग भी प्रेमचन्द के कथा फलक से विलग नहीं हो पाए हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए साहित्यकार श्याम महर्षि ने प्रेमचन्द रचना संसार के अनेक उदाहरण देते हुए उन्हें बेजोड व अनूठा शब्द शिल्पी बताया। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए साहित्यकार सत्यदीप ने कहा कि प्रेमचन्द खेल प्रेमी रहे हैं और उनकी कहानियों में खेल के अनेक प्रसंग साक्षात उपस्थित होते हैं।
मधु आचार्य को कागद सम्मान
हनुमानगढ। कागद फाउंडेशन ने इस वर्ष हिन्दी में मधु आचार्य आशावादी (बीकानेर) और राजस्थानी में पूर्ण शर्मा पूरण (रामगढ-नोहर) को कागद सम्मान अर्पित किया है। युवा सम्मान के लिए देवीलाल महिया (लूणकरणसर) का चयन किया गया है। निर्णायकों में डॉ. मंगत बादल, नरेश मेहन व डॉ. सन्देश त्यागी शामिल थे। ए सम्मान 12अगस्त को हनुमानगढ में होने वाले एक भव्य समारोह में दिए जाएँगे।

अखिल भारतीय डॉ.कुमुद टिक्कू कहानी प्रतियोगिता-2022 हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित

साहित्य समर्था के इस सालान आयोजन हेतु प्रविष्टियाँ साहित्य समर्था कार्यालय, ई-311, लालकोठी स्कीम, जयपुर- 302015(राज.) sahityasamartha @gmail.com आमंत्रित हैं-
कहानी कम्प्यूटर द्वारा टंकित होनी चाहिए, हाथ से लिखी कहानी मान्य नहीं होगी।
-लेखक द्वारा, अलग पृष्ठ पर कहानी के मौलिक, अप्रकाशित और अप्रसारित होने का प्रमाणपत्र जरूरी है।
-अपना संक्षिप्त परिचय,पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो संलग्न करें।
-कहानी के किसी भी पृष्ठ पर लेखक अपना नाम,पता अथवा पहचान का कोई भी चिह्न अंकित न करें अन्यथा प्रविष्टि रद्द कर दी जाएगी।
-कहानी की शब्द सीमा नहीं है।
-कहानी की दो प्रतियाँ डाक से 30 अक्टूबर ,2022 तक कार्यालय में भेजें।
-प्रथम पुरस्कार- अलंकरण पत्र -सम्मान राशि 7000/-रु.
-द्वितीय पुरस्कार-अलंकरण पत्र 6000/-रु.
डॉ. कुमुद टिक्कू विशिष्ट कहानी पुरस्कार -अलंकरण पत्र- सम्मान राशि-5000/-रु.
तृतीय पुरस्कार-अलंकरण पत्र -5000/-रु.
चुनी गई स्तरीय कहानियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
- नीलिमा टिक्कू,

विजयकिशोर व ओम निश्चल को माहेश्वर साहित्य सृजन सम्मान

मुरादाबाद, गत 22 जुलाई 2022 को माहेश्वर तिवारी के 83वें जन्मदिन पर अक्षरा संस्था मुरादाबाद द्वारा हिन्दी के सुधी साहित्यकार व कादंबिनी के पूर्व संपादक विजय किशोर मानव व डॉ. ओम निश्चल को माहेश्वर तिवारी साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान अक्षरा संस्था की ओर से विशाखा तिवारी, समीर तिवारी एवं डॉ आर सी शुक्ल ने मुरादाबाद में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया व उन्हें अंगवस्त्र, प्रशसितफलक, सरस्वती के प्रतीक चिह्न, श्रीफल व 5100/- की सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया।
हिन्दी के वरिष्ठ कवि एवं गीत के सशक्त हस्ताक्षर माहेश्वर तिवारी गए छह दशकों से लेखन में सक्रिय हैं और हरसिंगार कोई तो हो, नदी का अकेलापन, सच की कोई शर्त नहीं व फूल आए हैं कनेरों में आदि गीत कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। नवगीतों में बिम्बों के ताजातर प्रयोगों के लिए वे जाने जाते हैं तथा यश भारती सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। अक्षरा संस्था की ओर से यह सम्मान कई वर्षों से प्रदान किया जा रहा है। पुरस्कृत रचनाकार विजयकिशोर मानव जहाँ कविता, गीत, गजल व कहानी विधा में अनेक कृतियों के सर्जक हैं तथा हिन्दी अकादमी, दिल्ली, ऋतुराज सम्मान, मैसूर हिन्दी साहित्य सम्मेलन सम्मान, उप्र हिन्दी संस्थान के साहित्यभूषण सम्मान सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं; वहीं डॉ.ओम निश्चल हिन्दी के सुधी गीतकार, गजलगो, आलोचक व निबंधकार हैं तथा कविता, गीत, आलोचना, निबन्ध, संस्मरण की अनेक कृतियाँ प्रकाशित हैं व उन्हें हिन्दी अकादमी के युवा पुरस्कार, उप्र हिन्दी संस्थान, शाने अदब, विचार संस्था कोलकता के कल्याणमल लोढा साहित्य साधना सम्मान एवं यूको बैंक के अज्ञेय भाषा सेतु सम्मान से विभूषित किया गया है। मुरादाबाद में आयोजित इस समारोह में अक्षरा संस्था के पदाधिकारियों साहित्यकारों के साथ डॉ. माहेश्वर तिवारी, श्रीमती बालसुन्दरी तिवारी, डॉ मक्खन मुरादाबादी, कृष्ण कुमार नाज, योगेंद्र वर्मा व्योम, डॉ प्रेमवती उपाध्याय, जिया जमीर, डॉ मनोज रस्तोगी, राजीव प्रखर,वीरेंद्र सिंह व्रजवासी, ऋचा पाठक, शिशुपाल मधुकर, हेमा तिवारी, समीर तिवारी व मीनाक्षी ठाकुर उपसिथत थे। सभी उपसिथत कवियों ने पावस के विशेष सन्दर्भ में अपनी रचनाएँ सुनाकर भाव विभोर कर दिया। विजय किशोर मानव ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि माहेश्वर तिवारी की दशकों की समपित साहित्य यात्रा रही है तथा उनकी ओर से साहित्यकारों के लिए स्थापित यह पुरस्कार साहित्य के प्रति उनके स्नेह और आत्मीयता का ही परिचायक है। माहेश्वर तिवारी आज के परिदृश्य में मुरादाबाद में साहितियक गतिविधियों व रचनाशीलता के केन्द्र में हैं तथा उनके घर पर स्थानीय व दूरागत साहित्यकारों की आवाजाही और वैठकी बनी रहती है।
खानाबदोशियाँ : यारों संग तफरीह का लोकार्पण
वाणी प्रकाशन समूह द्वारा प्रकाशित न्यूज जगत में अपनी बहुमुखी प्रतिभा से पहचान बनाने वाले, जाने-माने न्यूज एँकर पंकज भार्गव की पहली किताब खानाबदोशियाँ : यारों संग तफरीह का लोकार्पण 22 जुलाई, दोपहर 3:30 बजे रॉयल नॉर्वेजियन एम्बेसी, नयी दिल्ली में भारत में नॉर्वे के राजदूत एच. ई. श्री हंस याकोब फ्रीडनलुंद द्वारा किया गया। लोकार्पण के उपलक्ष्य में भारत में नॉर्वे के राजदूत एच. ई. श्री हंस याकोब फ्रीडनलुंद ने कहा, मुझे यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि नॉर्वे के बारे में पहली बार यात्रा-वृत्तान्त की कोई पुस्तक हिन्दी में लिखी गयी है। आशा है कि इस पुस्तक के माध्यम से नॉर्वे एक मित्रता और आतिथ्य भाव रखने वाले राष्ट्र के रूप में और अधिक जाना जाएगा। इसके बाद वाणी प्रकाशन ग्रुप के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा मेरे विचार से खानाबदोशियाँ वो हल्की-हल्की प्राकृतिक सुगन्ध का झोका है जो जीवन स्वप्न को झकझोरता है। लगभग 25 वर्षों से समृद्ध हो रहा नॉर्वेजी साहित्य के साथ वाणी प्रकाशन ग्रुप का सम्बन्ध पंकज भार्गव की खानाबदोशियाँ : यारों संग तफरीह के साथ एक नए मुकाम पर पहुँचेगा। पुस्तक के लेखक पंकज भार्गव ने कहा मैं उम्मीद करता हूँ कि मेरा यात्रा वृत्तान्त युवाओं को नॉर्वे की यात्रा करने के लिए प्रेरित करेगा। खानाबदोशियाँ यायावरी का रस जो मेरे पाठकों को समर्पित है।
रंगकर्मी व लेखिका रमा पाण्डेय ने कहा खानाबदोशियाँ एक मीठी-सी किताब है ऐसी मीठी किताबें जो वजन में भी हल्की हो और आपको तनाव से मुक्त करती हो, ऐसी किताब के लिए पंकज भार्गव और वाणी प्रकाशन ग्रुप का धन्यवाद। कवि आलोक श्रीवास्तव ने कहा जब एक विसुअल मीडियम का पत्रकार लिखता है तो उसकी लेखनी में ओब्सर्वेशन बहुत अच्छा होता है। दरअसल खानाबदोशियाँ एक किताब नहीं बल्कि 70 द्वद्व का सिनेमा है। वरिष्ठ लेखक भगवानदास मोरवाल ने कहा पंकज भार्गव की किताब एक यात्रा संस्मरण है इस तरह के और यात्रा संस्मरण भी हिन्दी में आने चाहिए। वरिष्ठ कवियत्री सुमन केशरी ने कहा अपनी किताब में पंकज ने नॉर्वे के बारे में जो बताया उससे ऐसा लगा कि उनकी आँखों से उस शहर को देख लिया। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी व अंग्रेजी भाषा में वाणी प्रकाशन ग्रुप की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी-गोयल ने किया।

- दीपा, वाणी प्रकाशन

साधारण को असाधारण रूप से कहना ही व्यंग्य की विशेषता है : बुलाकी शर्मा
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के राजस्थानी विभाग द्वारा ऑनलाईन फेसबुक लाइव पेज पर गुमेज व्याख्यानमाला श्रृंखला के अन्तर्गत राजस्थानी भाषा के ख्यातनाम कहानीकार, साहित्यकार, व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि साधारण को असाधारण रूप से कहना ही व्यंग्य की विशेषता है और उसमें ही व्यंग्य की सार्थकता है।
राजस्थानी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी बोराणा ने बताया कि व्याख्यानमाला में बुलाकी शर्मा ने आधुनिक राजस्थानी व्यंग्य विधा पर बोलते हुए कहा कि आज की सबसे चर्चित विधा व्यंग्य विधा है । जिसमें तात्कालिक घटनाओं को व्यंग्य के रूप में सामने लाया जा सकता है, और व्यंग्य इसीलिए भी पसंद किए जाते हैं क्योंकि इसमें विसंगतियाँ, विरोधाभास, दोगलापन आदि उजागर होते हैं।
इस ऑनलाईन व्याख्यानमाला में देश भर से बडी संख्या में साहित्यकार, विद्वान और शोधार्थी, विद्यार्थी जुडे रहे। जिनमें डॉ. नीरज दइया, मीठेश निर्मोही, डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित, मोईनुदीन कोहरी, चन्द्रशेखर जोशी, राम गोपाल पारीक, मदन गोपाल लढ्ढा, सन्तोष चौधरी, डॉ.अनिता जैन, अंजु, दीपशिखा कविया, ममता मेहक, डॉ. नमामीशंकर आचार्य, डॉ. रामरतन लटियाल, डॉ. इन्द्रदान चारण, विष्णुशंकर, रणजीत, मुकेश राठौड, प्रदीप भट्नागर आदि प्रमुख हैं।
- मीनाक्षी बोराणा
देवेंद्र कुमार बंगाली काव्य सम्मान अरुणदेव को

सुखद सूचना है कि हिन्दी कविता के चर्चित हस्ताक्षर और समालोचन ई पत्रिका के सम्पादक अरुणदेव को प्रेमचन्द साहित्य संस्थान, गोरखपुर द्वारा प्रदत दूसरा देवेंद्र कुमार बंगाली काव्य सम्मान देने की घोषणा की गयी है। संस्थान के निदेशक प्रो. सदानन्द साही के अनुसार तीन सदस्यों की समिति (प्रो. अनिल राय,रघुवंश मणि और स्वप्निल श्रीवास्तव) ने सामूहिक निर्णय के द्वारा यह संस्तुति की। क्या तो समय, कोई तो जगह और उत्तर पैगम्बर जैसे तीन कविता संग्रहो और समालोचन ई पत्रिका के सम्पादक के रूप में कवि अरुण देव ने देश विदेश में ख्याति अर्जित की है। अरुणदेव को मधुमती परिवार की ओर से शुभकामनाएँ।
-डेस्क मधुमती
माधव नागदा को आचार्य लक्ष्मीकांत जोशी साहित्य पुरस्कार
जोधपुर में कला, संस्कृति, शिक्षा विचार मंच सृजना तथा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की ओर से जेएनवीयू के बृहस्पति सभागार में आयोजित अखिल राजस्थान स्तरीय आचार्य लक्ष्मीकान्त जोशी साहित्य सम्मान समारोह प्रख्यात लघुकथाकार डॉ. बलराम अग्रवाल (नई दिल्ली) के मुख्य आतिथ्य तथा कथाकार एवं शिक्षाविद् प्रेमप्रकाश व्यास की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ ।
इस समारोह में हिन्दी और राजस्थानी के जाने-माने कथाकार और आलोचक श्री माधव नागदा को उनकी लघुकथा- कृति माटी की महक के लिए इस वर्ष का आचार्य लक्ष्मीकान्त जोशी साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। सृजना की ओर से समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. बलराम अग्रवाल ने सम्मान स्वरूप 21 हजार नगद राशि एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर, समारोह अध्यक्ष डॉ. प्रेमप्रकाश व्यास ने शाल ओढाकर कथाकार नागदा को समादृत किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रख्यात लघुकथाकार डॉ.बलराम अग्रवाल (नई दिल्ली) ने सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि सृजन मनुष्य के जिन्दा रहने का एक औजार है। सृजन के लिए आवश्यक है कि वैचारिकता के पूर्व-निर्मित ढाँचे से, उनके खण्डहरों से मुक्ति पा ली जाए।
इस अवसर पर आचार्य लक्ष्मीकान्त जोशी साहित्य सम्मान से सम्मानित कथाकार माधव नागदा ने देश में बढ रही असहिष्णुता का जिक्र करते हुए कहा कि हम साहित्यकारों का दायित्व है कि ऐसा लेखन करें जो सामाजिक समरसता को बढाने वाला हो, जो समाज में सद्भाव, प्रेम और भाईचारा कायम रखने का संदेश देता हो।
समारोह के प्रारम्भ में कई पुस्तकों के लेखक अयोध्या प्रसाद गौड ने स्मृति शेष आचार्य लक्ष्मीकान्त जोशी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को रेखांकित किया। सृजना की अध्यक्ष कवयित्री सुषमा चौहान ने अतिथियों का स्वागत करने के उपरान्त संस्था की गतिविधियों से अवगत कराया।
समारोह में सृजना से जुडे तीन रचनाकारों - मुरलीधर वैष्णव की अर्न्तध्वनियाँ, डॉ.हरीदास की कहानी है कि खत्म ही नहीं होती और बसन्ती पँवार की नाक का सवाल के अंग्रेजी अनुवाद फॉर द सेक ऑफ नोज पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया ।
- लखेश्वर, जोधपुर

राजेश जोशी को भवभूति अलंकरण सम्मान- 2021
हिन्दी में अपनी तरह के विरल कवि राजेश जोशी को मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा उनकी उल्लेखनीय साहित्य सेवा के लिए भवभूति अलंकरण सम्मान- 2021 प्रदान करने की घोषणा हुई है। मधुमती पत्रिका की ओर से हार्दिक बधाई।
- डेस्क मधुमती
वरिष्ठ कवि, सम्पादक, विधेवेत्ता डॉ.संजीव कुमार का अभिनन्दन

प्रतिष्ठित लेखिका चित्रा मुद्गल ने कहा कि डॉ. संजीव कुमार के गद्य-पद्य लेखन में कुछ ऐसी दृष्टि विशेष विन्यस्त है जो उन्हें संजीदगी से पढने की माँग करती हैं। उनके पास अभिव्यक्ति की सहज भाषा, सम्प्रेषण और शैल्पिक सौष्ठव है। प्रबन्ध काव्य माधवी में स्त्री अस्मिता के प्रश्न को लेकर उसके आत्मसंघर्ष को डॉ. संजीव कुमार ने पूरे मनोयोग से चित्रित किया है जो पाठक के संग साथ चलता है। सुप्रसिद्ध उपन्यासकार ममता कालिया ने कहा कि रचनात्मक स्तर पर डॉ. संजीव की प्रखरता निरन्तर स्पष्ट हो रही है। विषयों की विविधता, प्रासंगिक, शोध और प्रांजल अभिव्यक्ति में वे विशेष हैं। उनकी ऊर्जा हम सबको स्फूर्ति देती है। वे नई दिल्ली के मयूर विहार के होटल क्राउन प्लाजा में सुपरिचित कवि, लेखक, रचनाकार, प्रकाशक, विधिवेत्ता समाज सेवी और इन्डिया नेटबुक्स के महानिदेशक डॉ.संजीव कुमार की 100वीं पुस्तक आज की मधुशाला के लोकार्पण पर उनके अभिनन्दन समारोह में बोल रही थी। व्यंग्य यात्रा, स्पन्दन संस्था, भोपाल-सिंगापुर संगम, सिंगापुर, वातायन (यू.के.) भारत दर्शन (न्यूजीलैण्ड), पाठक मंच, इक्कीसवीं शताब्दी के साहित्यकार, छत्तीसगढ मित्र एवं अनुस्वार अन्तर्राष्ट्रीय मंच द्वारा डॉ. संजीव कुमार का गरिमामय सम्मान किया गया।
व्यंग्यकार, वरिष्ठ साहित्यकार, व्यंग्यकार और मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी फारूक आफरीदी ने कहा कि एक साहित्यकार अपनी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति द्वारा समाज को प्रेरणा देता है। बहुआयामी प्रतिभा के धनी लेखक डॉ.संजीव कुमार ने अपनी साहित्य साधना से सौ पुस्तकें लिखी हैं जिनमें 60 से अधिक काव्य संग्रह हैं। वे गहरी संवेदना वाले कवि, मानवता के पक्षधर और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने वाले व्यक्ति हैं। उनकी बहुआयामी रचनात्मक उपलब्धियों के साथ मानवीय संवेदनाओं का जो चेहरा उभरता है वह श्लाघनीय है। समारोह में भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी प्रख्यात पत्रकार और भाषाविद् राहुल देव, डॉ. कैलाश वाजपेयी, डॉ. प्रेम जनमेजय, हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष संजीव निगम, राजेन्द्र निगम, प्रताप सहगल, शशि सहगल, ममता किरण, सुभाष चन्दर, रायपुर से गिरीश पंकज, जबलपुर से रमेश सैनी, हरीश पाठक, दिलीप तेतरबे, पंचकुला से श्याम सखा श्याम, हिसार से कमलेश भारतीय, जोधपुर से हरिप्रकाश राठी, रणविजय राव, राकेश पाण्डे, बलराम अग्रवाल,नीरज मित्तल (भावना प्रकाशन) हल्द्वानी से सौम्या दुआ आदि लेखकों, संस्कृतिकर्मी, पत्रकार और प्रबुद्धजन ने डॉ. संजीव कुमार की रचनाधर्मिता की मुक्तकण्ठ से सराहना करते हुए अपनी शुभकामनाएँ दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. लालित्य ललित और डॉ.राजेश कुमार ने किया।
इस अवसर पर इण्डिया नेटबुक्स परिवार के डॉ. संजीव कुमार, डॉ.मनोरमा और कामिनी मिश्रा आदि ने देश और विदेश से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों का शाल ओढाकर और पुस्तकें भेंट कर स्वागत किया गया।
- फारूक आफरीदी

माधव हाडा को प्रो. शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान
बीर विवेक परिवार द्वारा दिया जाने वाला प्रो. शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान इस वर्ष सुप्रसिद्ध अध्एता आलोचक प्रोफेसर माधव हाडा को प्रदान किया गया। निर्णायक समिति के सदस्यों साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत कवि लीलाधर जगूडी, अरुण कमल और कवि-आलोचक प्रो आशीष त्रिपाठी ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है। यह सूचना न्यासी श्रीमती भगवंती सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि सन्त सहित्य के विशेषज्ञ प्रोफेसर शुकदेव सिंह की स्मृति में हर वर्ष दिया जाने वाला यह सम्मान उनकी जन्मतिथि 24 जुलाई को समारोहपूर्वक वाराणसी में प्रदान किया गया है। इस अवसर पर आयोजित होने वाला वार्षिक प्रो.शुकदेव सिंह स्मृति व्याख्यान ख्यातिलब्ध कवि अरुण कमल ने व्याख्यान दिया।
पुरस्कृत लेखक प्रोफेसर माधव हाडा मध्यकालीन साहित्य के गम्भीर अध्एता और आलोचक के रूप में ख्यात हैं। वे मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर में हिन्दी के आचार्य के रूप में कार्यरत रहे हैं। प्रोफेसर हाडा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में फेलो भी रह चुके हैं।
उनकी प्रमुख मौलिक कृतियाँ देहरी पर दीपक (2021),मुनि जिनविजय (2016) पचरंग चोला पहर सखी री (2015),सीढिया चढता मीडिया (2012),मीडिया,साहित्य और संस्कृति(2006),कविता का पूरा दृश्य(1992) और तनी हुई रस्सी पर(1987) प्रकाशित हैं। मीरं पर केंद्रित उनकी बहुप्रशंसित पुस्तक पचरंग चोला पहर सखी री का अंग्रेजी में Meera vs Meera नाम से अनुवाद भी हो चुका है। प्रोफेसर हाडा ने अपनी इस पुस्तक में मीरं के जीवन,उनके समय और कविता को लेकर प्रचलित हो चुकी कई अवधारणाओं का खंडन करते हुए कई नई अवधारणाओं का विकास करते हुए मीरं के सम्बंध में नई स्थापनाएँ दी हैं। उनकी यह बहसतलब पुस्तक मीरं के अध्ययन की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है और इसे हिन्दी के अध्एताओं-आलोचकों ने खुले मन से स्वीकार किया है।
प्रोफेसर माधव हाडा ने कई महत्त्वपूर्ण सम्पादन भी किए हैं,जिनमें प्रमुख हैं-एक भव अनेक नाम(2022), सोनै काट न लागै (2021), कबीर, सूरदास, तुलसीदास, अमीर खुसरो, रैदास और मीरं पुस्तकों का श्ाृखला संपादन (2021), मीरं रचना संचयन(2017) और लय (1997)। इसके अतिरिक्त ख्यातलब्ध पत्र-पत्रिकाओं में उनके शताधिक लेख और शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
प्रोफेसर हाडा साहित्य अकादेमी के साधारण परिषद के सदस्य और हिन्दी परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में 2012-2017 तक अपना योगदान दे चुके हैं। उनके लेखन के लिए उन्हें 2012 में प्रकाशन विभाग भारत सरकार के भारतेंदु हरिश्चन्द्र सम्मान और 1990 में राजस्थान साहित्य अकादेमी के देवराज उपाध्याय आलोचना पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। कार्यक्रम के संयोजक,हिन्दी विभाग बीएचयू में प्रोफेसर मनोज कुमार सिंह ने कार्यक्रम के सम्बंध में जानकारी देते हुए बताया कि स्मृतिशेष शुकदेव सिंह के 89 वें जन्मदिन पर आयोजित होने वाला यह सम्मान कार्यक्रम दिनांक 24 जुलाई 2022 को बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन में आयोजित किया जाएगा। हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि अरुण कमल प्रोफेसर माधव हाडा को सम्मानित करेंगे एवं इस अवसर पर श्री अरुण कमल भक्ति काव्य पर केंद्रित विशिष्ट व्याख्यान भी देंगे।

- -मनोज कुमार सिंह

डॉ. रवीन्द्र को साहित्यश्री और सवाई सिंह को मिलेगा
समाज सेवा सम्मान

राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूँगरगढ द्वारा भाषा, साहित्य व संस्कृति के क्षेत्र में सुदीर्घ सेवा के लिए दिए जाने वाले साहित्यश्री सम्मान और सामाजिक सरोकारों को समर्पित श्री रामकिशन उपाध्याय स्मृति समाज सेवा सम्मान की घोषणा कर दी गई है । इस आशय की जानकारी देते हुए संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने बताया कि संस्था द्वारा 20 वर्ष से अधिक समय तक की सेवा के लिए प्रतिवर्ष दिए जाने वाले राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध श्री मलाराम माली स्मृति साहित्यश्री सम्मान और सामाजिक सरोकारों को समर्पित व्यक्तित्व को अर्पित किए जाने वाले श्री रामकिशन उपाध्याय स्मृति समाज सेवा सम्मान की घोषणा की गई है। संस्था के मंत्री रवि पुरोहित ने बताया कि इस वर्ष साहित्यश्री सम्मान मेरठ के प्रख्यात शिक्षाविद, साहित्यकार, संपादक डॉ. रवीन्द्र को और समाजसेवा सम्मान जयपुर के सवाई सिंह को अर्पित किए जाएँगे। संयुक्त मंत्री सत्यनारायण योगी ने बताया कि 14 सितम्बर, 2022 को संस्था के वार्षिकोत्सव के अवसर पर चयनित विद्वानों को ग्यारह हजार रूपए नगद राशि के साथ सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न, शॉल अर्पित किए जाएँगे। समारोह समन्वयक महावीर माली ने बताया कि संस्था के हिन्दी, राजस्थानी भाषा के सृजन पुरस्कार व महिला लेखन पुरस्कार की घोषणा भी शीघ्र की जावेगी।
डॉ. रवीन्द्र कुमार - सुप्रसिद्ध विद्वान और भारतीय शिक्षाशास्त्री डॉ. रवीन्द्र कुमार मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं और देश-विदेश की अनेक सांस्कृतिक, सामाजिक, बौद्धिक और शैक्षणिक संस्थाओं से सम्बद्ध रहने के साथ ही एक सौ से अधिक पुस्तकों के लेखक-सम्पादक हैं। विश्व के लगभग एक सौ विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में चार सौ से अधिक व्याख्यान दे चुके डॉ. कुमार को वर्ष 2001 में उल्लेखनीय शैक्षणिक-साहित्यिक सेवाओं के लिए माननीय राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से समादृत किया जा चुका है।
सवाई सिंह - 25 नवम्बर, 1953 को ग्राम सिंहलका (अलवर) में जन्मे सिंह का जीवन संघर्ष को समर्पित रहा है। महात्मा गाँधी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जीवन मूल्यों से बेहद प्रभावित सिंह सामाजिक समता और सामाजिक न्याय के लिए गरीब, दलित व पिछडों की आवाज को बुलन्द करने में सदैव अग्रणी रहे हैं। इस हेतु सम्पूर्ण क्रांति यात्रा, ग्राम स्वराज्य पदयात्रा व वाहन यात्रा, किसान आन्दोलन, शानित-सद्भाव व भाईचारे को समर्पित वैचारिक उपक्रमों, दलित, महिला, अल्पसंख्यकों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए सदैव प्रयत्नशील व क्रियाशील रहे हैं।
- रवि पुरोहित
मीठेश निर्मोही साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2021
साहित्य अकादेमी,नई दिल्ली की ओर से नई दिल्ली स्थित कमानी सभागार में सुप्रतिष्ठ मराठी लेखक,कवि एवं आलोचक भालचन्द्र नेमाडे के मुख्य आतिथ्य में साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2021 अर्पण समारोह सम्पन्न हुआ। समारोह में 24 भाषाओं के पुरस्कार विजेता साहित्यकारों में शामिल राजस्थानी और हिन्दी के सुप्रतिष्ठ कवि, कथाकार आलोचक, सम्पादक, तथा अनुवादक मीठेश निर्मोही को उनकी राजस्थानी काव्य कृति मुगती के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से समादृत किया गया ।
समारोह में अकादेमी के सचिव के.श्रीनिवासराव ने निर्मोही के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को रेखांकित कर, अकादेमी के उपाध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने माल्यर्पण कर तथा अध्यक्ष डॉ . चन्द्रशेखर कम्बार ने मीठेश निर्मोही को साहित्य अकादेमी की ओर से शॉल, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार स्वरूप एक लाख रुपए की राशि का डी.डी. भेंट किया।
मीठेश निर्मोही की कविताओं और कहानियों का रूसी तथा अंग्रेजी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है। श्री निर्मोही राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी में तीन बार सामान्य सभा के सदस्य रहे हैं ।
-आलोक रावल

विश्वप्रसिद्ध मार्क रोथको कला केंद्र में अमित कल्ला होंगे सम्भागी
चित्रकार और कवि, अमित कल्ला उन दस वैश्विक कलाकारों में से एक हैं, जो आधुनिक अमूर्त कलाकार मार्क रोथको के जन्मस्थान में मार्क रोथको कला केन्द्र में चित्रकला संगोष्ठी और रेजीडेंसी के लिए चुने गए हैं।

मार्क रोथको कला केन्द्र में यह अनूठा निवास जहां दुनिया के दस कलाकार गम्भीर रूप से सार अभिव्यक्तिवादी दृश्य कला अभ्यास के केन्द्रीय विचारों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे।
सभी दस चयनित कलाकार दौगावपिल्स के किले में रहेंगे और साथ में काम करेंगे सभी कलाकरों को रोथको और दौगावपिल्स के इलाके से प्रेरित काम करने का दायित्व सौंपा गया है। संगोष्ठी के अंत में, मार्क रोथको कला केन्द्र में दस कलाकारों द्वारा बनाए गए कार्यों से क्यूरेट की गई एक प्रदर्शनी होगी। कल्ला के दो कार्य केन्द्र के स्थायी संग्रह का हिस्सा बनेंगे। प्रदर्शनी का उद्घाटन 16 सितम्बर को है और प्रदर्शनी अक्टूबर तक रहेगा।
-डेस्क मधुमती